होम › Brass Scrap Rate
Brass Scrap Rate — पीतल का भाव
तांबे और ज़िंक का मेल — भाव भी इन्हीं दोनों के साथ चलता है।
आज का भाव चाहिए? ये पेज भाव बनने का तरीक़ा समझाता है — ताज़ा Rate रोज़ बदलता है।
मंडी का भाव हर घंटे सीधे फ़ोन पर पाने के लिए All Pricess WhatsApp सेवा से जुड़िए।
पीतल असल में क्या है
पीतल (Brass) तांबे और ज़िंक को मिलाकर बनी धातु है। इसलिए तांबा और ज़िंक का भाव चढ़े तो पीतल भी चढ़ता है। पीतल में तांबा जितना ज़्यादा, भाव उतना बेहतर।
पीतल के कबाड़ के आम ग्रेड
- बर्तन (Bartan): पुराने लोटे, थाली, पूजा का सामान — साफ़ हों तो अच्छा भाव
- पुर्ज़े / फ़िटिंग (Purja): नल, वाल्व, नट-बोल्ट, प्लंबिंग का सामान
- शीट / चादर: पीतल की पट्टियाँ और कटिंग
- बुरादा: मशीनिंग के छिलके — तेल-मिट्टी और लोहे की मिलावट पर कटौती
- मिक्स पीतल: लोहे-प्लास्टिक के हिस्सों समेत — सबसे कम
भाव किन बातों से बदलता है
- तांबे का LME/MCX भाव — पीतल का सबसे बड़ा आधार
- ज़िंक का भाव
- नल-फ़िटिंग और सजावटी सामान बनाने वाली फैक्ट्रियों की माँग (जैसे जामनगर, मुरादाबाद)
- माल में लोहा, प्लास्टिक या रबर की मिलावट
असली पीतल की पहचान
- रंग: पीला-सुनहरा; तांबे की तरह लाल नहीं
- चुंबक: असली पीतल नहीं चिपकता — चिपके तो अंदर लोहा है (पीतल चढ़ा लोहा)
- खुरचकर देखिए: ऊपर की परत के नीचे भी वही रंग हो
- वज़न: पीतल भारी होता है; हल्का "पीतल" अक्सर कुछ और निकलता है
बेहतर दाम के तरीके
- नल-वाल्व से लोहे के पेच, रबर-प्लास्टिक के वॉशर निकाल दीजिए।
- बर्तन, पुर्ज़े और बुरादा अलग रखिए।
- बुरादे को सुखाकर, तेल निकालकर बेचिए।
- तांबे का रुख़ देखकर बेचिए — ऊपर जा रहा हो तो थोड़ा रुकना फ़ायदे का हो सकता है।
❓ सवाल-जवाब
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज brass scrap का Rate क्या है?+
पीतल का भाव ग्रेड (बर्तन, पुर्ज़े, बुरादा) और शहर के हिसाब से अलग होता है और तांबे-ज़िंक के साथ रोज़ बदलता है। All Pricess की WhatsApp सेवा पर रोज़ का भाव आता है।
पीतल और तांबे में क्या फ़र्क़ है?+
तांबा शुद्ध धातु है और लाल रंग का होता है; पीतल तांबे और ज़िंक का मेल है और पीला-सुनहरा दिखता है।
पीतल का भाव तांबे से कम क्यों होता है?+
क्योंकि पीतल में तांबे के साथ सस्ता ज़िंक मिला होता है। इसलिए पीतल का भाव आम तौर पर तांबे से नीचे रहता है।
पीतल का बुरादा कम भाव पर क्यों बिकता है?+
बुरादे में तेल, मिट्टी और लोहे के बारीक टुकड़े मिले होते हैं और गलाने पर नुक़सान ज़्यादा होता है, इसलिए उस पर कटौती लगती है।